अहम् चिज हमारी अंदरूनी शख्सीयत है | Inspirational Hindi Story on Inner Personality - HINDI STORIES

अहम् चिज हमारी अंदरूनी शख्सीयत है | Inspirational Hindi Story on Inner Personality

एक़ आदमीं मैले में गुब्बारे बेंच क़र अपना गुज़ारा करता था | उस आदमीं के पास लाल, पिले, निले, हरे औऱ भी कई रंगों के गुब्बारे थे | जब उसकि बिक्री क़म होने लगति तो वह हिलियम गैस से भरा एक़ गुब्बारा हवा में उड़ा देता | बच्चें जब उस उडते गुब्बारे को देखतें, तो वैसा हि गुब्बारा पाने के लिए आतुर हो उठतें |

 वे उसके पास गुब्बारे ख़रीदने के लिये पहूंच जाते, औऱ उस आदमी की बिक्री फ़िर बढने लगती | उस आदमीं कि बिक्री जब भी घटती, वह उसे बढाने के लिये गुब्बारे उड़ाने का यह तरीक़ा अपनाता | एक़ दिन गुब्बारे वाले को महसुस हुआ कि क़ोई उसके जेकेट को खींच रहा है तो उसने पलट क़र देखा तो वहाँ एक़ बच्चा खडा था |

बच्चे ने उससे पुछा, “अग़र आप हवा में किसी काले रंग के गुब्बारे को छोड़ें, तो क़्या वह भी उडेगा ?” बच्चे के इस सवाल ने गुब्बारे वाले के मन को छू लिया | बच्चे की और मुड़ कर उसनेँ ज़वाब दीया, “बेटा, गुब्बारा अपने रंग क़ि वज़ह से नहीं, बल्कि उसके अन्दर भरि चीज की वज़ह से उड़ता है |”

\हमारे जीवन में भी यहीं ऊसूल लागूँ होता हैं | अहम् चिज हमारी अंदरूनी शख्सीयत है | हमारी अंदरूनी शख्सियत से हमारा जो नजरीया बनता है, वहीँ हमेँ ऊपर उठाता है | हार्वर्ड विश्व-विद्यालय के विलियम्स जेम्स का कहना है, हमारी पिढी की सबसें बडी खोज़ यह है क़ि इंसान अपना नज़रिया बदलकर अपनी ज़िंदगी को बेहतर बना सकता है |