दाडि में आग और चापलूसी - HINDI STORIES

दाडि में आग और चापलूसी

दाडि में आग और चापलूसी

बादशाह अकबर की यह आदत थी की वह अपने दरबारीयों से तरह-तरह के प्रष्न किया करते थे। एक दिन बादषाह ने दरबारीयों से प्रश्न किया, अगर इस दरबार में सभी दाडी वाले हो और सबकी दाडी में आग लग जाये जिसमें मैं भी शामिल हूं तो आप किसकी दाडी पहले बुझााऐंगे ?

हुजूर की दाडी की। बादशाह आपकी,सभी लोग एक साथ बोल पडे। बादशाह को लगा, जैसे सब झूठ बोल रहे हैं। उन्होंने बीरबल से पूछा, बताओं किसकी दाडी की आग सबसे पहले बुझाओगे ?

हुजूर सबसे पहले मैं अपनी दाडी की आग बुझाउंगा, फिर किसी और की दाडी की ओर देखूंगा। बीरबल ने उत्तर दिया।
बीरबल के उत्तर से बादशाह बहुत खुश हुए और बोले, मुझे खुश करने के उद्देष्य से आप सब झुठ बोल रहे थे। सच बात तो यह हैं कि हर आदमी सबसे पहले अपने बारे में सोचता है। चापलुसी की हद है। अगर आप चापलुसी करना छोड दे. तो बीरबल जैसे हो जायेंगे।